Education
यदि आपने कभी अपने आप से यह पूछा है कि शिक्षा क्या है ? तो यह मेरे लिए सचमुच आश्चर्य की बात होगी आप विद्यालय क्यों जाते हैं ? आप विविध विषय क्यों पढ़ते हैं ? क्यों आप परीक्षाएं उत्तीर्ण करते हैं ? और ऊंचा स्थान प्राप्त करने के लिए दूसरों के साथ स्पर्धा करते हैं आखिर क्या अर्थ है इस तथाकथित शिक्षा काम ?
यह सब कुछ क्या है ? यह सचमुच अत्यधिक महत्वपूर्ण प्रश्न हैं केवल विद्यार्थियों के लिए नहीं अपितु माता-पिता के लिए शिक्षकों के लिए और उन समस्त व्यक्तियों के लिए जो वसुधा से प्रेम करते हैं शिक्षित होने के लिए हम संघर्ष क्यों करते हैं हम कुछ परीक्षाएं पास कर ले किसी उद्योग में लग जाएं क्या शिक्षा का बस इतना ही अर्थ है ?
अथवा शिक्षा का कार्य है कि वह हमें बचपन से ही जीवन की संपूर्ण प्रक्रिया को समझने में सहायता करें कुछ उद्योग करना अपनी जीविका कम आना जरूरी है निसंदेह केवल उद्योग या कोई व्यवसाय ही जीवन नहीं है जीवन बड़ा अद्भुत है यह असीम और अगाध है , यह अनंत रहस्यों के लिए हुए हैं एक विशाल साम्राज्य है जहां हम मानव कर्म करते हैं और हमें अपने आप को केवल आजीविका के लिए तैयार करते हैं तो हम जीवन का पूरा लक्ष्य ही खो देते हैं कुछ परीक्षाएं उद्दीन कर लेने और गणित रसायन शास्त्र अथवा अन्य किसी विषय में प्रवीणता प्राप्त कर लेने की अपेक्षा जीवन को समझना कहीं ज्यादा कठिन है
तब शिक्षा का कार्य क्या है? क्या वह इस सड़े हुए भी समाज के ढांचे के अनुकूल बनने में आपको सहायता करें या आपको स्वतंत्रता दे पूर्ण स्वतंत्रता कि आप 1 दिन समाज का एक नूतन विश्व का निर्माण कर सकें हमें ऐसी स्वतंत्रता की आवश्यकता है
सुदूर भविष्य में नहीं अपितु इसी क्षण अन्यथा हम सभी नष्ट हो जाएंगे हमें अविलंब एक स्वतंत्रता पूर्ण वातावरण तैयार करना होगा ताकि आप उस में रहकर अपने लिए सत्य की खोज कर सके आप मेधावी बन सके आप ही विश्व को स्वीकार कर सकें उनके साथ संघर्ष करने में समर्थ हो सके ताकि आप अपने अंदर सतत एक गहरी मनोवैज्ञानिक विद्रोह की अवस्था में रह सके ।
क्योंकि सत्य की खोज तो केवल वही कर सकते हैं जो सतत इस विद्रोह की अवस्था में रहते हैं वह नहीं जो परंपराओं को स्वीकार करते हैं और उनका अनुसरण करते हैं आप सत्य अथवा प्रेम को तभी उपलब्ध हो सकते हैं जब आप खोज करते हैं सतत निरीक्षण करते हैं और निरंतर सीखते रहते हैं लेकिन यदि आप भयभीत हैं तब आपने तो खोज कर सकते हैं ना निरीक्षण कर सकते हैं मैं सीख सकते हैं ने गहराई से जागरूक ही रह सकते हैं अतः निर्विवाद रूप से शिक्षा का यह कार्य है कि वह इस आंतरिक और बाह्य भय का उच्च चेतन करें यह जो मानव की विचारों को उनके संबंधों और उनके प्रेम को नष्ट कर देता है।
Comments
Post a Comment