क्या है अवसाद ?
दुनिया भर में लगभग 35 करोड़ लोग अवसाद ग्रस्त रहते हैं. ये विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आँकड़े हैं और इनके मुताबिक़ अवसाद की बीमारी से ग्रस्त तीन-चौथाई से अधिक लोग विकासशाल देशों में रहते हैं.
विशेषज्ञ कहते हैं कि अवसाद की सबसे खराब स्थिति में पीड़ित आत्महत्या तक कर सकता है. लगभग 10 लाख लोग हर साल आत्महत्या करते हैं और उनमें से एक बड़े अनुपात में लोग अवसाद से पीड़ित होते हैं. भारत में भी करीब पांच करोड़ लोग इससे पीड़ित माने जाते हैं.
अवसाद के तीन लक्षण:-
1. मूड यानी मिज़ाज. सामान्य उदासी इसमें नहीं आती लेकिन किसी भी काम या चीज़ में मन न लगना, कोई रुचि न होना, किसी बात से कोई खुशी न होनी, यहां तक गम का भी अहसास न होना अवसाद का लक्ष्ण है.
2. विचार यानी हर समय नकारात्मक सोच होना
3. शारीरिक जैसे नींद न आना या बहुत नींद आना. रात को दो-तीन बजे नींद का खुलना और अगर यह दो सप्ताह से अधिक चले तो अवसाद की निशानी है.
बचाव:-
1. नींद को नियमित रखना
2. अच्छा खाना और समय पर खाना
3. तनाव तो सभी को होता है लेकिन ऐसा विचार रखना कि इसे कैसे कम रखना है
4. महत्वकांक्षा को उतना ही रखना जितना हासिल करना संभव हो
5. परिवार के साथ जुड़े रहना
6. अपने कार्य में व्यस्त और मस्त रहना
विकार का खतरा
विकासशील देशों में रहने वाले लोगों के हर 10 में से आठ को कोई उपचार प्राप्त नहीं होता.
डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि अवसाद दुनिया के सभी क्षेत्रों में आम है. डब्ल्यूएचओ के एक हाल के अध्ययन से पता चला है कि पिछले वर्ष लगभग पांच प्रतिशत लोगों को अवसाद था.
अवसाद सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और जैविक कारकों के एक जटिल मिश्रण का परिणाम होता है.
डब्ल्यूएचओ के अनुसार अवसाद और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच एक रिश्ता होता है. उदाहरण के तौर पर हृदय रोग से अवसाद हो सकता है और अवसाद से हृदय रोग.
इसके अलावा आर्थिक दबावों, बेरोजगारी, आपदाओं और संघर्ष से भी विकार का खतरा बढ़ सकता है.
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